अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से

Sunday, 28 February 2021

बादलों के पार

 

*बादलों के पार* बादलों के पार बसते हैं मेरे पिया के गाँव पथरीले रास्ते पग हैं थके से पर मन का जुनून थका नहीं सजन देख लो मेरी अनुभूतियाँ तेरे पास आने को हैं बहुत आतुर रूकना जरा बादल हमको भी ले लेना संग रह न जाऊं अकेली पथ है पथरीले हो जायेगी थोड़ी देर सजन को संदेशा देना मेरे आने की आ रही हूँ मैं । अनिता मंदिलवार सपना

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