*बादलों के पार* बादलों के पार बसते हैं मेरे पिया के गाँव पथरीले रास्ते पग हैं थके से पर मन का जुनून थका नहीं सजन देख लो मेरी अनुभूतियाँ तेरे पास आने को हैं बहुत आतुर रूकना जरा बादल हमको भी ले लेना संग रह न जाऊं अकेली पथ है पथरीले हो जायेगी थोड़ी देर सजन को संदेशा देना मेरे आने की आ रही हूँ मैं । अनिता मंदिलवार सपना
अंबिकापुर सरगुजा छतीसगढ़ से साहित्यकार, व्याख्याता जीवविज्ञान, समाजसेवा के लिए तत्पर अनिता मंदिलवार 'सपना', हिन्दी साहित्य और अंग्रेजी साहित्य में स्नात्तकोतर, पीजीडीसीए, बी• एड•, आकाशवाणी से वाणी सर्टिफिकेट प्राप्त । आकाशवाणी अंबिकापुर में विगत बाईस वर्षों से महिलाओं के कार्यक्रम घर आँगन कार्यक्रम में कम्पीयरिंग, तीस रेडियो नाटक, बीस रेडियो रूपक लेखन, कहानियों, कविताओं का प्रसारण आकाशवाणी और दूरदर्शन से ।
अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से
Sunday, 28 February 2021
Wednesday, 21 October 2020
https://youtu.be/3oNCnBL-98Y *कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना अम्बिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ की कविता 'उठालो तलवार' पूरी देख कर बताएं आपको कैसी लगी? यदि पसंद आये तो वीडियो को लाइक, शेयर, कमेंट करें और चैनल को सब्सक्राइब भी अवश्य करें और मुझे विजय बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका दर्शाएं। आपकी प्रतिक्रिया लाइक और व्यूज और कमेंट के आधार पर ही प्रतियोगिता का परिणाम घोषित किया जाएगा*। पसंद आये तो शेयर भी करें 🙏
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