चक्रव्यूह
चक्रव्यूह रचते हैं देखो तो
छुप छुप कर लोग यहाँ ।
अर्जुन बनना है अब तो
चक्रव्यूह तोड़ना है सारे ।।
अनिता मंदिलवार "सपना"
अंबिकापुर सरगुजा छतीसगढ़ से साहित्यकार, व्याख्याता जीवविज्ञान, समाजसेवा के लिए तत्पर अनिता मंदिलवार 'सपना', हिन्दी साहित्य और अंग्रेजी साहित्य में स्नात्तकोतर, पीजीडीसीए, बी• एड•, आकाशवाणी से वाणी सर्टिफिकेट प्राप्त । आकाशवाणी अंबिकापुर में विगत बाईस वर्षों से महिलाओं के कार्यक्रम घर आँगन कार्यक्रम में कम्पीयरिंग, तीस रेडियो नाटक, बीस रेडियो रूपक लेखन, कहानियों, कविताओं का प्रसारण आकाशवाणी और दूरदर्शन से ।
संस्मरण रेडियो श्रोता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ रेडियो और मैं बचपन से रेडियो सुनने का शौक था मुझे । बचपन में रेडियो सुनते सुनते सो...
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