अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से

Saturday, 13 August 2022

आजादी का अमृत महोत्सव

 


आजादी का अमृत महोत्सव 



15 अगस्त को मनाया जाने वाला भारत का राष्ट्रीय त्योहार है और हम इसे बड़े उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाते हैं। इस वर्ष हम अपना 76वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। इस दिन हम उन महान योद्धाओं और स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति का सम्मान करते हैं जिन्होंने भारत को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। 15 अगस्त वर्ष 1947 को भारत के इतिहास को स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया। इसी दिन देश के आजाद होने पर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर झंडा फहराया था। तभी से प्रत्येक वर्ष देश के प्रधानमंत्री लाल किले पर झंडा फहराते है, राष्ट्रगान गाते है और सभी शहीद स्वतंत्रता सेनानियों को 21 तोपों से श्रद्धांजलि दी जाती है। देश के प्रधानमंत्री हर साल देशवासियों को अपने भाषण के द्वारा सम्बोधित करते है और सेना द्वारा अपना शक्ति प्रदर्शन और परेड मार्च करते है। स्वतंत्रता दिवस के दिन सभी भारतवासियों के मन में देशभक्ति की भावना के साथ-साथ पूर्ण जोश रहता है।
      आजादी के बाद भारत देश अब तक बहुत उन्नति कर चुका है। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के दिन सभी विद्यालय, कॉलेज, संस्थान, बाजार, कार्यालय और कारखाने आदि बंद रहते है। इस दिन सरकारी छुट्टी होती है। जगह-जगह पर झंडा फहराया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों  में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमें सभी छात्र-छात्राएं भाग लेते है और देशभक्ति के गीत गाते है, कोई कविता सुनाता है तो कोई सांस्कृतिक गीतों पर नृत्य करते है।

      भारत को 15 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिली।आजादी से पहले भारत एक ब्रिटिश उपनिवेश था और उस अवधि के दौरान हमारे लोगों ने बहुत कुछ सहा है और अपने प्राणों की आहुति दी है। स्वतंत्रता के बाद जन्म लेने वाले लोगों को गर्व महसूस करना चाहिए क्योंकि वे स्वतंत्र भारत में जन्म लेने के लिए भाग्यशाली हैं। इसलिए उन्हें हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को स्वीकार करना चाहिए। आजादी के बाद, हमें अपना संविधान मिला और हम अपने मौलिक अधिकारों का आनंद लेने में सक्षम हैं। हम सभी को एक भारतीय होने पर गर्व होना चाहिए, और हमें अपने भाग्य की प्रशंसा करनी चाहिए कि हम स्वतंत्र भारत की भूमि में पैदा हुए हैं।
1857 से 1947 तक, इतिहास ने हमारे महान नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के कई विद्रोह और बलिदान को देखा है। हमें उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों जैसे महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और लाखों अन्य लोगों के बलिदानों को नहीं भूलना चाहिए, जिनके नाम भी ज्ञात नहीं हैं, लेकिन उन्होंने भारत को अंग्रेजों के औपनिवेशिक शासन से मुक्त करने के लिए संघर्ष किया । हमें गांधीजी के अहिंसा दर्शन जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की शिक्षाओं को याद रखना चाहिए और अपने जीवन में उसका पालन करना चाहिए। स्वतंत्रता दिवस के इस शुभ अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है।
देश भर के लोगों द्वारा राष्ट्रगान गाया जाता है।भारत का स्‍वतंत्रता दिवस हर वर्ष 15 अगस्‍त को देश भर में हर्ष उल्‍लास के साथ मनाया जाता है । यह प्रत्‍येक भारतीय को एक नई शुरूआत की याद दिलाता है। इस दिन 200 वर्ष से अधिक समय तक ब्रिटिश उपनिवेशवाद के चंगुल से छूट कर एक नए युग की शुरूआत हुई थी। 15 अगस्‍त 1947 वह भाग्‍यशाली दिन था जब भारत को ब्रिटिश उपनिवेशवाद से स्‍वतंत्र घोषित किया गया और नियंत्रण की बागडोर देश के नेताओं को सौंप दी गई। भारत द्वारा आजादी पाना उसका भाग्‍य था, क्‍योंकि स्‍वतंत्रता संघर्ष काफी लम्‍बे समय चला और यह एक थका देने वाला अनुभव था, जिसमें अनेक स्‍वतंत्रता सेनानियों ने अपने जीवन कुर्बान कर दिए।
       आज हम आजाद होकर खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं तो इसका पूरा श्रेय स्वंतत्रता सेनानियों को ही जाता है। जिन्होंने दिन-रात एक कर इसके लिए लड़ाई लड़ी। कई तरह की यातनाएं सहीं। तो उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता के दृष्टि से ये दिन बहुत महत्व रखता है। इसके साथ ही देश के प्रति अपने कर्तव्यों और देशभक्ति का महत्व समझने के लिए भी स्वतंत्रता दिवस हम सबके लिए बहुत मायने रखता है।

अनिता मंदिलवार सपना
व्याख्याता, साहित्यकार ब
अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़


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