अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से

Thursday, 20 May 2021

आज कुछ नया करना है- अनिता मंदिलवार सपना


 शुभ प्रभात आप सभी को 


नयी रचना के साथ



 *आज कुछ नया करना है* 


आज कुछ 

नया करना है 

देखो 

उन सफेद फूलों से 

उड़ते सेमल को 

मुट्ठी में कैद करना है 

अंजुलि में 

भरने की इच्छा 

बहुत मुश्किल है 

जब हवा भी 

प्रतिरोध करें !

आज कुछ

 नया करना है 

उड़ती पतंग की गति 

और मन की उड़ान 

दोनों की समानता 

आसमान को छूना 

बहुत मुश्किल 

पूरे हो अरमान 

जब अपने ही 

विरोध करें !

आज कुछ 

नया करना है 

उड़ती चिड़िया 

कितनी मगन 

तिनके तिनके से 

बना घोसला 

नहीं जानती 

आगे क्या हो 

किसी ने उजाड़ दिया 

बहुत मुश्किल है 

समझना 

कभी तो 

मानव बोध करें !

अब कुछ 

नया करना है 

नदियों का 

कम होता जल 

कंक्रीट का शहर 

बने थल 

कोई न जाने 

यहाँ होगा क्या कल 

बहुत मुश्किल है 

समझना 

जब प्रकृति शोध करें 

जब प्रकृति प्रतिशोध करें !


 *अनिता मंदिलवार "सपना"*

10 comments:

  1. सुंदर भावाभिव्यक्ति 👍

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  2. बहुत ही सुंदर आप की कल्पनासिलता है और बहुत ही सुंदर लेखन है

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  3. कुछ नया करने की चाह अपने आत्मविश्वास को जगाते हुए एक दृढ़संकल्प को दर्शाता हुआ विचार
    बहुत ही सुन्दर है

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    1. धन्यवाद । आपका नाम नहीं दिख रहा है । नीचे नाम लिख दिया कीजिए ।

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  4. बहुत सुंदर रचना

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  5. बहुत खूब दीदी जी

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  6. अनुपम रचना
    शुभकामनाएं 🙏🏻🌺

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