शुभ प्रभात आप सभी को
नयी रचना के साथ
*आज कुछ नया करना है*
आज कुछ
नया करना है
देखो
उन सफेद फूलों से
उड़ते सेमल को
मुट्ठी में कैद करना है
अंजुलि में
भरने की इच्छा
बहुत मुश्किल है
जब हवा भी
प्रतिरोध करें !
आज कुछ
नया करना है
उड़ती पतंग की गति
और मन की उड़ान
दोनों की समानता
आसमान को छूना
बहुत मुश्किल
पूरे हो अरमान
जब अपने ही
विरोध करें !
आज कुछ
नया करना है
उड़ती चिड़िया
कितनी मगन
तिनके तिनके से
बना घोसला
नहीं जानती
आगे क्या हो
किसी ने उजाड़ दिया
बहुत मुश्किल है
समझना
कभी तो
मानव बोध करें !
अब कुछ
नया करना है
नदियों का
कम होता जल
कंक्रीट का शहर
बने थल
कोई न जाने
यहाँ होगा क्या कल
बहुत मुश्किल है
समझना
जब प्रकृति शोध करें
जब प्रकृति प्रतिशोध करें !
*अनिता मंदिलवार "सपना"*

सुंदर भावाभिव्यक्ति 👍
ReplyDeleteप्रणाम गुरूदेव जी । आभार आपका
DeleteThis comment has been removed by the author.
Deleteबहुत ही सुंदर आप की कल्पनासिलता है और बहुत ही सुंदर लेखन है
ReplyDeleteआभार
Deleteकुछ नया करने की चाह अपने आत्मविश्वास को जगाते हुए एक दृढ़संकल्प को दर्शाता हुआ विचार
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर है
धन्यवाद । आपका नाम नहीं दिख रहा है । नीचे नाम लिख दिया कीजिए ।
Deleteबहुत सुंदर रचना
ReplyDeleteबहुत खूब दीदी जी
ReplyDelete
ReplyDeleteअनुपम रचना
शुभकामनाएं 🙏🏻🌺