अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से

Monday, 5 July 2021

सपनों का मोल- अनिता मंदिलवार सपना

 *सपनों का मोल* 


एक लड़की 

जो प्रेम पाना चाहती थी

प्रेम के बदले 

समर्पण चाहती थी

समर्पण के बदले

क्या उसकी चाह

गलत थी ?


सभी ने उसे 

अपने हिसाब से 

उसका उपयोग 

करना चाहा

क्या घर 

और क्या बाहर

प्रेम न उसे मिलना था

न ही मिल पाया !

उसकी चाहत का क्या 

उसके सपनों का क्या

कोई मोल था या है ?

शायद नहीं  

उसकी चाहत ही

गलत है 

उसे कुछ पाने का 

हक नहीं है 

हाँ,  नहीं है -----!


 *अनिता मंदिलवार "सपना"*

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