*सपनों का मोल*
एक लड़की
जो प्रेम पाना चाहती थी
प्रेम के बदले
समर्पण चाहती थी
समर्पण के बदले
क्या उसकी चाह
गलत थी ?
सभी ने उसे
अपने हिसाब से
उसका उपयोग
करना चाहा
क्या घर
और क्या बाहर
प्रेम न उसे मिलना था
न ही मिल पाया !
उसकी चाहत का क्या
उसके सपनों का क्या
कोई मोल था या है ?
शायद नहीं
उसकी चाहत ही
गलत है
उसे कुछ पाने का
हक नहीं है
हाँ, नहीं है -----!
*अनिता मंदिलवार "सपना"*

No comments:
Post a Comment