अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से

Wednesday, 7 July 2021

नवगीत - भरे पलक - सपना




नवगीत


भरे पलक स्नेह समर्पण 

आकर मुझे रिझाते हैं ।


प्रेम भरे अभिनंदन पर

नेह भरा उत्सव समर्पण 

रोम रोम श्वास समर्पित 

प्रीत रंगा गीत अर्पण 

नेह पगी देह गंध से

मन को ये महकाते हैं  ।


ह्रदय बजते नेह वंशी

भरे जागृति प्रलय पुंज 

भूली यादें नयी हुई

जीवन राग किसलय कुंज 

सपने बुनते प्रणय रंग

अनुपम रस छलकाते हैं  ।


चिड़िया पंखों से झलती

बन टहनी बाँहे झूली

आँधी भावुक हो मचली

हवा में पंथ वह भूली

खिली धूप में चिट्ठियों के 

खूब संदेशे आते हैं ।


भरे पलक••••

आकर••••••


अनिता मंदिलवार सपना 

 

 


1 comment:

  1. वाह्ह्ह्ह्ह उत्कृष्ट शानदार
    बेहतरीन प्रस्तुति
    सादर प्रणाम आपको
    जय राधे राधे श्याम कृष्णा

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