अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से

Sunday, 18 July 2021

भरोसा- अनिता मंदिलवार सपना


 🌹*भरोसा* 🌹


भरोसा जब किया हमने,

                 लगा उसे भ्रम है ।

चक्षु बंद हैं  उसके,

                 और अपनी नम है ।।

जग को दिया है उजाला,

               मेरे हिस्से क्यूँ तम हैं ।

कर्म करती रही सपना,

                लगे हर बार कम है ।।


 *अनिता मंदिलवार "सपना"*

4 comments:

  1. कर्म करती रही सपना,

    लगे हर बार कम है ।।
    वाह वाह बहुत सुन्दर सृजन है दीदी जी

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  2. बहुत बढ़िया

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  3. हृदय स्पर्शी...👌👌😊😊💐💐

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