अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से

Sunday, 31 October 2021

छत्तीसगढ़ दर्शन

चौपाई

भारत दर्शन 
छत्तीसगढ़ राज्य 
( संस्कृति, कला, साहित्य )

 *लोकगीत, लोकनृत्य, लोकभाषा* 

भाषा इसकी है सरल, सजा मधुर है गीत ।
मीठी लगती बात है, बोल सरस ले  जीत ।

जहाँ लोक संस्कृति हो ऐसा।
जीवन भी हो जाता वैसा।।
चंदैनी गीत पंडवानी ।
सुनो नहीं इसकी है सानी।।

गहिरा, घासीदास महाना।
परिचित है सब लोग जहाना।।
बस्तर के महाकाव्य धनकुल।
हरिहर के तो भाग्य गए खुल।।

देवदास बंजारे नामी।
सोच देख वही दूरगामी।।
पंथी नृत्य को है मढ़ाया ।
छत्तीसगढ़ी मान बढ़ाया ।।

सभी सतपुड़ा शोभा जानो।
महानदी को महान मानो।।
सागौन, साल शोभा न्यारे ।
हरियाली भर देखो प्यारे ।।

छत्तीसगढ़ी विद्या सागर।
रामदयाल उत्तमा आगर।।
गाँव फूल घलो गोठियाथे 
प्यारेलाल याद जो आथे ।।


 *खानपान, त्योहार, व्रत* 

देखो अनुपम रीत ये, पल पल में  त्योहार ।
पाहुन का सत्कार हो, प्रेम धर्म है सार ।।

करम वृक्ष बनता है  राजा
श्रम करते माने सब काजा
करमा नाचे माँदर साजा
बजता लय गीत संग बाजा

फुगड़ी लंगडी खेल मटकन।
बचपन की वह अटकन बटकन।।
उत्सव मनता मड़ई मेला।
भिन्न भिन्न दिखता है खेला।।

परंपरागत तीजा, पोरा
माता भेजे साड़ी कोरा
मातर साथी आमाखाई
गोंचा, सरहुल है सुखदाई

बोली समृध्द मातृभाषा है
छत्तीसगढ़ी परिभाषा है
लिपि देवनागरी इसकी
व्याकरण सरल समझो जिसकी

भजिया, भुजिया, मुठिया,चीला।
परिधान खिलता यहाँ  पीला।।
शृंगारित नारी मन *मोहे* ।
बिंदी माथे पर है *सोहे* ।।


 *मूर्तिकला, वास्तुकला, वेशभूषा* 

अपना है छत्तीसगढ़, सुंदर पावन धाम ।
अंबा का है राज्य ये, मन में बसते राम l

छत्तीसगढ़ छटा को देखो 
इसका वर्णन अब तो लेखोl
*परिधान नार नर जो पहने* l
*रुप अनुपम उनके क्या कहने* l


,लुगरी लहँगा सलुखा, साया।
देख सभी का मन भरमाया।।
लुरकी, तिरकी, खिनवा, झुमके।
छत्तीसगढ़ी नारी ठुमके।।

शिवमंदिर चन्दखुरी साया।
बारसूर और महामाया ।।
पुरातत्व कहता चढ़ माथा।
इतिहास सुनाता है गाथा 

मंदिर सुंदर नागर शैली।
वास्तुकला चहुँ दिशि में फैली।।
 मूर्तिकला नक्काशी माना।
खजुराहो पर्यटन समाना।।

बम्बलेश्वरी माता रानी ।
 माँ दंतेश्वरी शक्ति मानी ।।
सजे रायगढ़ देउरकोना ।
डीपाडीह पर्यटन होना ।।

*साहित्य* 

कविता, नाटक, गद्य की, अपनी है पहचान ।
छत्तीसगढ़ी लोक की, आप अलग है शान ।।

भारत दर्शन है करवाती।
भारत की झलकी दिखलाती।।
पढ़ो कथा पर्रा भर लाई।
श्यामलाल की है परछाई 

शृंगार शतक, कुंडल, छाया।
वहीं संगीत जीवन पाया।।
समाज सेवक, क्रांति नाटक।
बलदेव की लेखनी त्राटक।।

बख्शी जी की अंजलि, कारी।
झलमला कहानी है सारी।।
शतदल अश्रुदल है कविता ।
बनेगी निबंध कभी भविता ।।

गीता माधव गंगालहरी।
भाव सार रामायण गहरी।।
काठ कहानी का वो सपना।
माधव जी को पढ़कर जपना।।

दानलीला, करुणापच्चीसी ।
पढ़कर दिख जाती बत्तीसी।।
सुंदरलाल लिखें हैं नाटक 
ज्यों बहना ने पहना ताटक।।

(ताटक- कान में पहनने वाला गहना)

 ©️ *अनिता मंदिलवार "सपना"* 
व्याख्याता, साहित्यकार
अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़

 

No comments:

Post a Comment

रेडियो श्रोता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

 संस्मरण  रेडियो श्रोता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ  रेडियो और मैं बचपन से रेडियो सुनने का शौक था मुझे । बचपन में रेडियो सुनते सुनते सो...