अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से

Thursday, 20 January 2022

आईना हूँ


 नई प्रस्तुति ......


हाथ बढ़ाओ जरा और सँभाल लो हमें ।

गमों के दौर से बाहर निकाल लो हमें ।।

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जिन्दगी यूँ ही तमाम बीत जायेगी यहाँ ।

ऑखों में अपने ख्वाब सा पाल लो हमें ।।

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वक्त की गर्दिश में गुम हो न जायें कहीं ।

वक्त रहते ही थोड़ा सा खंगाल लो हमें ।।

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यूँ दूर रहकर हमसे दूरियाॅ न बढ़ाओ ।

पास आकर तुम जरा देखभाल लो हमें ।।

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कोई पत्थर के जैसा न समझो मुझको ।

नगीना समझ हाथों में डाल लो हमें ।।

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देखो यहाँ रहे न कोई 'सपना' अधूरा ।

आईना हूँ देखकर जरा सँवार लो हमें ।।


......... ..................सपना

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