नई प्रस्तुति ......
हाथ बढ़ाओ जरा और सँभाल लो हमें ।
गमों के दौर से बाहर निकाल लो हमें ।।
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जिन्दगी यूँ ही तमाम बीत जायेगी यहाँ ।
ऑखों में अपने ख्वाब सा पाल लो हमें ।।
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वक्त की गर्दिश में गुम हो न जायें कहीं ।
वक्त रहते ही थोड़ा सा खंगाल लो हमें ।।
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यूँ दूर रहकर हमसे दूरियाॅ न बढ़ाओ ।
पास आकर तुम जरा देखभाल लो हमें ।।
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कोई पत्थर के जैसा न समझो मुझको ।
नगीना समझ हाथों में डाल लो हमें ।।
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देखो यहाँ रहे न कोई 'सपना' अधूरा ।
आईना हूँ देखकर जरा सँवार लो हमें ।।
......... ..................सपना
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