अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से

Wednesday, 19 May 2021

सपनों का आबंध नहीँ- अनिता मंदिलवार सपना


सपनों का आबंध नहीं 

कोई छंद नहीं 
अनुबंध नहीं 
सपनो का अब
आबंध नहीं 
अब रहना है
स्वतंत्र हमें 
जीना है बस
अपने ही लिए
दूसरों के लिए
जी कर देख लिए
मिलता है केवल
संताप यहाँ 
किसी सोच में अब
बंधना नहीं 
माया से अब
अपना संबंध नहीं 
मेरी सोच सबके लिए
अच्छा है
अब बात यही
बस सच्चा है
जो जान न पाये
सच्चाई 
फिर क्या बचा है
अच्छाई 
जीवन का कोई
आकार न हो
सपना कोई 
साकार न हो
सपनों की दुनिया
छोड़ चले
अब बस जीना
अपने ही लिए !

अनिता मंदिलवार 


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