*मैं कौन हूँ*
आज फिर से अंदर से
एक आवाज आई
मैं कौन हूँ?
कहते हैं नारी की
पहली जिम्मेदारी
घर, परिवार, बच्चे
अपने आप को तोड़कर
पूरी करती रही जिम्मेदारी
फिर भी नारी क्यों हारी !
क्या उसका कसूर
बस इतना था
वह जीना चाहती थी
कुछ पल अपने लिए
उड़ना चाहती थी
उन्मुक्त गगन में
उसकी क्या गलती थी
अपनी क्षमताओं का
उपयोग ही तो करना
चाहती थी
गढ़ना चाहती थी
एक नया इतिहास !
दूसरों की छोड़ो
अपनों ने भी
साथ नहीं दिया
बस आज भी
नारी की परिभाषा
इतनी सी है
वह औरों के लिए जिए
हाँ, बस औरों के लिए
*अनिता मंदिलवार "सपना"*

अपनी क्षमताओं का सही उपयोग उत्तम भाव
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