अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से

Wednesday, 10 August 2022

नेह का बंधन रक्षाबंधन

 *नेह का बंधन रक्षाबंधन*


रक्षा सूत्र - स्नेह बंधन

भाई
हाँ ये बस
एक छोटा सा
शब्द है
पर इसमें छिपा है
बहन का अप्रतिम प्रेम
ये वही भाई समझ पाता है
जिसकी बहन नहीं होती
रक्षा के धागों के बिन
जब कलाई सूनी रह जाती है
जब पत्र से राखी भेजी
और तुमने कलाई पर
बाँध ली
एक आत्मसंतोष चेहरे पर
तेरे मेरे जो दिखे
वही तो स्नेह का बंधन है
बचपन में अगर
कोई खेल-खेल में
रूठने मनाने वाला न हो
तो भाई हो या बहन
दोनों महसूस करते हैं
एक दूसरे की कमी को
मुझे एक ऐसा भाई मिला
जिसके दीदी भर कह देने से
मेरे मन में उमड़ आता है
ढेरों प्यार
भले उसकी कलाई में
मैंने रक्षा सूत्र न बांधे हो
पर उसके लिए है
मन में अगाध प्रेम
वो भाई देश की सेवा
में तत्पर है
मुझे ऐसे भाई पर नाज है
जिसकी दीदी होना
मेरे लिए गर्व की बात है ।

अनिता मंदिलवार सपना
व्याख्याता
अंबिकापुर सरगुजा छतीसगढ़


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