अंबिकापुर सरगुजा छतीसगढ़ से साहित्यकार, व्याख्याता जीवविज्ञान, समाजसेवा के लिए तत्पर अनिता मंदिलवार 'सपना', हिन्दी साहित्य और अंग्रेजी साहित्य में स्नात्तकोतर, पीजीडीसीए, बी• एड•, आकाशवाणी से वाणी सर्टिफिकेट प्राप्त । आकाशवाणी अंबिकापुर में विगत बाईस वर्षों से महिलाओं के कार्यक्रम घर आँगन कार्यक्रम में कम्पीयरिंग, तीस रेडियो नाटक, बीस रेडियो रूपक लेखन, कहानियों, कविताओं का प्रसारण आकाशवाणी और दूरदर्शन से ।
अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से
Sunday, 31 October 2021
Saturday, 28 August 2021
समय तो आएगा ही- अनिता मंदिलवार सपना
समय तो आएगा ही
समय तो आएगा ही जब हम सोचते हैं तो सफलता हमसे एक कदम हर बार पीछे चली जाती है । हर पल जीवन में नए अवसरों का एक बड़ा भंडार है। इसलिए, हमें इस कीमती समय को जाने नहीं देना चाहिए और हमेशा इसका पूरा उपयोग करना चाहिए। यदि हम समय के मूल्य और संकेत को समझने में देर करते हैं, तो हम अपने जीवन से स्वर्णावसर और सबसे महत्वपूर्ण समय को खो देंगे। यह जीवन का सबसे आधारपूर्ण सत्य है कि, हमें कभी भी अपने स्वर्ण अवसर को अनावश्यक समझते हुए अपने से दूर जाने नहीं देना चाहिए। समय बहुत ही शक्तिशाली होता है; कोई भी इसके सामने घुटने टेक सकता है, लेकिन इसे हरा नहीं सकता। हम इसकी क्षमता को मापने में सक्षम नहीं है, क्योंकि कभी-कभी जीतने के लिए एक पल ही काफी होता है और कभी-कभी जीतने के लिए पूरा जीवन लग जाता है। कोई भी एक पल में अमीर हो सकता है और कोई भी एक ही पल में गरीब भी हो सकता है। जीवन और मृत्यु के बीच में अन्तर के लिए केवल एक ही पल काफी होता है। सभी पल हमारे लिए स्वर्णावसर लाते हैं, हमें तो केवल समय के संकेत को समझ कर उसका प्रयोग करने की आवश्यकता है।हमें दूसरों की गलतियों से सीखने के साथ ही दूसरों की सफलता से प्रेरित होना चाहिए। हमें अपने समय का उपयोग कुछ उपयोगी कामों को करने में करना चाहिए ताकि, हमें समय समृद्धि दे, न कि नष्ट करे ।
समय की बर्बादी हमें और हमारे भविष्य को बर्बाद करती है। हम कभी भी बर्बाद किए हुए समय को फिर से प्राप्त नहीं कर सकते हैं। यदि हम अपना समय बर्बाद कर रहे हैं, तो हम सब कुछ नष्ट कर रहे हैं । समय की कीमत पहचानिए । ये सोचिए कि समय आएगा ही ।
बीता समय कभी वापस नहीं आता ।
अनिता मंदिलवार "सपना"
Sunday, 18 July 2021
भरोसा- अनिता मंदिलवार सपना
🌹*भरोसा* 🌹
भरोसा जब किया हमने,
लगा उसे भ्रम है ।
चक्षु बंद हैं उसके,
और अपनी नम है ।।
जग को दिया है उजाला,
मेरे हिस्से क्यूँ तम हैं ।
कर्म करती रही सपना,
लगे हर बार कम है ।।
*अनिता मंदिलवार "सपना"*
Wednesday, 7 July 2021
नवगीत - भरे पलक - सपना
नवगीत
भरे पलक स्नेह समर्पण
आकर मुझे रिझाते हैं ।
प्रेम भरे अभिनंदन पर
नेह भरा उत्सव समर्पण
रोम रोम श्वास समर्पित
प्रीत रंगा गीत अर्पण
नेह पगी देह गंध से
मन को ये महकाते हैं ।
ह्रदय बजते नेह वंशी
भरे जागृति प्रलय पुंज
भूली यादें नयी हुई
जीवन राग किसलय कुंज
सपने बुनते प्रणय रंग
अनुपम रस छलकाते हैं ।
चिड़िया पंखों से झलती
बन टहनी बाँहे झूली
आँधी भावुक हो मचली
हवा में पंथ वह भूली
खिली धूप में चिट्ठियों के
खूब संदेशे आते हैं ।
भरे पलक••••
आकर••••••
अनिता मंदिलवार सपना
बहनें-अनिता मंदिलवार सपना
बहनें
बहनें कैसी होती हैं ।
बहनें ऐसी होती हैं ।।
बहनें होती हैं पुनीता
नाम है जिनका सुनीता
निराशा के भंवर में भी
आशा बनती है अनीता
बहनें ऊर्जा का संचार
परिवार का आधार
आपस का देखो प्यार
मिश्रण ममता और दुलार
उनकी आपस की बातें
बीते सारी सारी रातें
यादों का खुले पिटारा
जब सब संग रह पातें
दूर रहे या पास रहे
ह्रदय में आभास रहे
मन से दूर कभी नहीं
सपना सायास रहे
अनिता मंदिलवार "सपना"
Monday, 5 July 2021
चक्रव्यूह- अनिता मंदिलवार सपना
चक्रव्यूह
चक्रव्यूह रचते हैं देखो तो
छुप छुप कर लोग यहाँ ।
अर्जुन बनना है अब तो
चक्रव्यूह तोड़ना है सारे ।।
अनिता मंदिलवार "सपना"
मैं कौन हूँ- अनिता मंदिलवार सपना
*मैं कौन हूँ*
आज फिर से अंदर से
एक आवाज आई
मैं कौन हूँ?
कहते हैं नारी की
पहली जिम्मेदारी
घर, परिवार, बच्चे
अपने आप को तोड़कर
पूरी करती रही जिम्मेदारी
फिर भी नारी क्यों हारी !
क्या उसका कसूर
बस इतना था
वह जीना चाहती थी
कुछ पल अपने लिए
उड़ना चाहती थी
उन्मुक्त गगन में
उसकी क्या गलती थी
अपनी क्षमताओं का
उपयोग ही तो करना
चाहती थी
गढ़ना चाहती थी
एक नया इतिहास !
दूसरों की छोड़ो
अपनों ने भी
साथ नहीं दिया
बस आज भी
नारी की परिभाषा
इतनी सी है
वह औरों के लिए जिए
हाँ, बस औरों के लिए
*अनिता मंदिलवार "सपना"*
रेडियो श्रोता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ
संस्मरण रेडियो श्रोता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ रेडियो और मैं बचपन से रेडियो सुनने का शौक था मुझे । बचपन में रेडियो सुनते सुनते सो...
-
होली की हार्दिक शुभकामनायें फागुन फागुन की रीत चली मन में है प्रीत पली होली में कान्हा संग खेल रही गोपियाँ।।१ गाल हुए लाल श्याम मले गुलाल ...
-
बहनें बहनें कैसी होती हैं । बहनें ऐसी होती हैं ।। बहनें होती हैं पुनीता नाम है जिनका सुनीता निराशा के भंवर में भी आशा बनती है अनीता बहनें...
-
*बादलों के पार* बादलों के पार बसते हैं मेरे पिया के गाँव पथरीले रास्ते पग हैं थके से पर मन का जुनून थका नहीं सजन देख लो मेरी अनुभूत...





