अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से

Saturday, 20 August 2022

रेडियो श्रोता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

 संस्मरण 


रेडियो श्रोता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 



रेडियो और मैं

बचपन से रेडियो सुनने का शौक था मुझे । बचपन में रेडियो सुनते सुनते सो जाती थी मैं । बिस्तर से मेरी माँ रेडियो को बंद करके मेज पर रखती थी । ये प्रतिदिन का नियम सा था । रेडियो सुनने का जुनून इस कदर हावी था कि टेलीविजन आने के बाद भी मैं रेडियो सुनती थी । आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पढ़ाई के वक्त भी धीमी आवाज में हमारा रेडियो बजता रहता । रेडियो से लगाव ने लेखन में रूचि पैदा की । और समाचार पत्र भी पढ़ने का उतना ही शौक रहा ।
रेडियो से जुड़ाव ने हमें आकाशवाणी से जोड़ा ।
आकाशवाणी से जुड़ना मेरे लेखन में निखार को गति दी । रेडियो से मुझे मेरी पहचान मिली । साहित्य अभिरुचि पहले से रही मुझमें । गद्य और पद्य दोनों जिसमें बहुत सारे रेडियो नाटक और रूपक भी शामिल है । महिलाओं का कार्यक्रम घर आँगन कार्यक्रम की प्रस्तुत कर्ता के रूप में लगभग बाईस सालों से सजीव प्रस्तुति दे रही हूँ । आज भी रेडियो उतना ही महत्वपूर्ण है मेरे लिए ।
शादी के बाद ससुराल भी अपना रेडियो लेकर आई । मेरे रेडियो के प्रति लगाव देखकर मेरे पतिदेव ने मेरे लिए नया रेडियो लाकर दिया ।
ये जन्म दिन का सबसे अनमोल उपहार मेरे लिए आज तक में से है । वो रेडियो मेरे पास है ।
खास है मेरे लिए रेडियो और रेडियो से जुड़े सभी लोग ।

अनिता मंदिलवार "सपना"

Saturday, 13 August 2022

आजादी का अमृत महोत्सव

 


आजादी का अमृत महोत्सव 



15 अगस्त को मनाया जाने वाला भारत का राष्ट्रीय त्योहार है और हम इसे बड़े उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाते हैं। इस वर्ष हम अपना 76वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। इस दिन हम उन महान योद्धाओं और स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति का सम्मान करते हैं जिन्होंने भारत को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। 15 अगस्त वर्ष 1947 को भारत के इतिहास को स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया। इसी दिन देश के आजाद होने पर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर झंडा फहराया था। तभी से प्रत्येक वर्ष देश के प्रधानमंत्री लाल किले पर झंडा फहराते है, राष्ट्रगान गाते है और सभी शहीद स्वतंत्रता सेनानियों को 21 तोपों से श्रद्धांजलि दी जाती है। देश के प्रधानमंत्री हर साल देशवासियों को अपने भाषण के द्वारा सम्बोधित करते है और सेना द्वारा अपना शक्ति प्रदर्शन और परेड मार्च करते है। स्वतंत्रता दिवस के दिन सभी भारतवासियों के मन में देशभक्ति की भावना के साथ-साथ पूर्ण जोश रहता है।
      आजादी के बाद भारत देश अब तक बहुत उन्नति कर चुका है। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के दिन सभी विद्यालय, कॉलेज, संस्थान, बाजार, कार्यालय और कारखाने आदि बंद रहते है। इस दिन सरकारी छुट्टी होती है। जगह-जगह पर झंडा फहराया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों  में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमें सभी छात्र-छात्राएं भाग लेते है और देशभक्ति के गीत गाते है, कोई कविता सुनाता है तो कोई सांस्कृतिक गीतों पर नृत्य करते है।

      भारत को 15 अगस्त, 1947 को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिली।आजादी से पहले भारत एक ब्रिटिश उपनिवेश था और उस अवधि के दौरान हमारे लोगों ने बहुत कुछ सहा है और अपने प्राणों की आहुति दी है। स्वतंत्रता के बाद जन्म लेने वाले लोगों को गर्व महसूस करना चाहिए क्योंकि वे स्वतंत्र भारत में जन्म लेने के लिए भाग्यशाली हैं। इसलिए उन्हें हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को स्वीकार करना चाहिए। आजादी के बाद, हमें अपना संविधान मिला और हम अपने मौलिक अधिकारों का आनंद लेने में सक्षम हैं। हम सभी को एक भारतीय होने पर गर्व होना चाहिए, और हमें अपने भाग्य की प्रशंसा करनी चाहिए कि हम स्वतंत्र भारत की भूमि में पैदा हुए हैं।
1857 से 1947 तक, इतिहास ने हमारे महान नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के कई विद्रोह और बलिदान को देखा है। हमें उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों जैसे महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और लाखों अन्य लोगों के बलिदानों को नहीं भूलना चाहिए, जिनके नाम भी ज्ञात नहीं हैं, लेकिन उन्होंने भारत को अंग्रेजों के औपनिवेशिक शासन से मुक्त करने के लिए संघर्ष किया । हमें गांधीजी के अहिंसा दर्शन जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की शिक्षाओं को याद रखना चाहिए और अपने जीवन में उसका पालन करना चाहिए। स्वतंत्रता दिवस के इस शुभ अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है।
देश भर के लोगों द्वारा राष्ट्रगान गाया जाता है।भारत का स्‍वतंत्रता दिवस हर वर्ष 15 अगस्‍त को देश भर में हर्ष उल्‍लास के साथ मनाया जाता है । यह प्रत्‍येक भारतीय को एक नई शुरूआत की याद दिलाता है। इस दिन 200 वर्ष से अधिक समय तक ब्रिटिश उपनिवेशवाद के चंगुल से छूट कर एक नए युग की शुरूआत हुई थी। 15 अगस्‍त 1947 वह भाग्‍यशाली दिन था जब भारत को ब्रिटिश उपनिवेशवाद से स्‍वतंत्र घोषित किया गया और नियंत्रण की बागडोर देश के नेताओं को सौंप दी गई। भारत द्वारा आजादी पाना उसका भाग्‍य था, क्‍योंकि स्‍वतंत्रता संघर्ष काफी लम्‍बे समय चला और यह एक थका देने वाला अनुभव था, जिसमें अनेक स्‍वतंत्रता सेनानियों ने अपने जीवन कुर्बान कर दिए।
       आज हम आजाद होकर खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं तो इसका पूरा श्रेय स्वंतत्रता सेनानियों को ही जाता है। जिन्होंने दिन-रात एक कर इसके लिए लड़ाई लड़ी। कई तरह की यातनाएं सहीं। तो उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता के दृष्टि से ये दिन बहुत महत्व रखता है। इसके साथ ही देश के प्रति अपने कर्तव्यों और देशभक्ति का महत्व समझने के लिए भी स्वतंत्रता दिवस हम सबके लिए बहुत मायने रखता है।

अनिता मंदिलवार सपना
व्याख्याता, साहित्यकार ब
अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़


Wednesday, 10 August 2022

नेह का बंधन रक्षाबंधन

 *नेह का बंधन रक्षाबंधन*


रक्षा सूत्र - स्नेह बंधन

भाई
हाँ ये बस
एक छोटा सा
शब्द है
पर इसमें छिपा है
बहन का अप्रतिम प्रेम
ये वही भाई समझ पाता है
जिसकी बहन नहीं होती
रक्षा के धागों के बिन
जब कलाई सूनी रह जाती है
जब पत्र से राखी भेजी
और तुमने कलाई पर
बाँध ली
एक आत्मसंतोष चेहरे पर
तेरे मेरे जो दिखे
वही तो स्नेह का बंधन है
बचपन में अगर
कोई खेल-खेल में
रूठने मनाने वाला न हो
तो भाई हो या बहन
दोनों महसूस करते हैं
एक दूसरे की कमी को
मुझे एक ऐसा भाई मिला
जिसके दीदी भर कह देने से
मेरे मन में उमड़ आता है
ढेरों प्यार
भले उसकी कलाई में
मैंने रक्षा सूत्र न बांधे हो
पर उसके लिए है
मन में अगाध प्रेम
वो भाई देश की सेवा
में तत्पर है
मुझे ऐसे भाई पर नाज है
जिसकी दीदी होना
मेरे लिए गर्व की बात है ।

अनिता मंदिलवार सपना
व्याख्याता
अंबिकापुर सरगुजा छतीसगढ़


Thursday, 20 January 2022

आईना हूँ


 नई प्रस्तुति ......


हाथ बढ़ाओ जरा और सँभाल लो हमें ।

गमों के दौर से बाहर निकाल लो हमें ।।

           @@@@@

जिन्दगी यूँ ही तमाम बीत जायेगी यहाँ ।

ऑखों में अपने ख्वाब सा पाल लो हमें ।।

            @@@@@

वक्त की गर्दिश में गुम हो न जायें कहीं ।

वक्त रहते ही थोड़ा सा खंगाल लो हमें ।।

             @@@@@

यूँ दूर रहकर हमसे दूरियाॅ न बढ़ाओ ।

पास आकर तुम जरा देखभाल लो हमें ।।

             @@@@@

कोई पत्थर के जैसा न समझो मुझको ।

नगीना समझ हाथों में डाल लो हमें ।।

             @@@@@

देखो यहाँ रहे न कोई 'सपना' अधूरा ।

आईना हूँ देखकर जरा सँवार लो हमें ।।


......... ..................सपना

Thursday, 6 January 2022

हम

 


हम

मैं
और तुम
अब हैं हम
हम शब्द
एहसास दिलाता है
दो व्यक्तियों के लिए
समाज, परिवार
और देश के लिए
आज देश को
जरूरत है हम बनें
हम कोशिश करें
मैं रहकर हम बनने की
साथ होकर
एक हुए हमेशा
कामयाब हुए
क्योंकि
एकता में शक्ति होती है
ऐसा पढा, देखा,सीखा हमनें
तो आइए आज हम
साथ न होकर भी
साथ निभायें अपनों के
देश के प्रति
अपनी जिम्मेदारी निभायें
यही तो प्रेम है
देश प्रेम
जिसने हमें सब दिया है
अब हमारी बारी है ।

अनिता मंदिलवार सपना


Sunday, 31 October 2021

छत्तीसगढ़ दर्शन

चौपाई

भारत दर्शन 
छत्तीसगढ़ राज्य 
( संस्कृति, कला, साहित्य )

 *लोकगीत, लोकनृत्य, लोकभाषा* 

भाषा इसकी है सरल, सजा मधुर है गीत ।
मीठी लगती बात है, बोल सरस ले  जीत ।

जहाँ लोक संस्कृति हो ऐसा।
जीवन भी हो जाता वैसा।।
चंदैनी गीत पंडवानी ।
सुनो नहीं इसकी है सानी।।

गहिरा, घासीदास महाना।
परिचित है सब लोग जहाना।।
बस्तर के महाकाव्य धनकुल।
हरिहर के तो भाग्य गए खुल।।

देवदास बंजारे नामी।
सोच देख वही दूरगामी।।
पंथी नृत्य को है मढ़ाया ।
छत्तीसगढ़ी मान बढ़ाया ।।

सभी सतपुड़ा शोभा जानो।
महानदी को महान मानो।।
सागौन, साल शोभा न्यारे ।
हरियाली भर देखो प्यारे ।।

छत्तीसगढ़ी विद्या सागर।
रामदयाल उत्तमा आगर।।
गाँव फूल घलो गोठियाथे 
प्यारेलाल याद जो आथे ।।


 *खानपान, त्योहार, व्रत* 

देखो अनुपम रीत ये, पल पल में  त्योहार ।
पाहुन का सत्कार हो, प्रेम धर्म है सार ।।

करम वृक्ष बनता है  राजा
श्रम करते माने सब काजा
करमा नाचे माँदर साजा
बजता लय गीत संग बाजा

फुगड़ी लंगडी खेल मटकन।
बचपन की वह अटकन बटकन।।
उत्सव मनता मड़ई मेला।
भिन्न भिन्न दिखता है खेला।।

परंपरागत तीजा, पोरा
माता भेजे साड़ी कोरा
मातर साथी आमाखाई
गोंचा, सरहुल है सुखदाई

बोली समृध्द मातृभाषा है
छत्तीसगढ़ी परिभाषा है
लिपि देवनागरी इसकी
व्याकरण सरल समझो जिसकी

भजिया, भुजिया, मुठिया,चीला।
परिधान खिलता यहाँ  पीला।।
शृंगारित नारी मन *मोहे* ।
बिंदी माथे पर है *सोहे* ।।


 *मूर्तिकला, वास्तुकला, वेशभूषा* 

अपना है छत्तीसगढ़, सुंदर पावन धाम ।
अंबा का है राज्य ये, मन में बसते राम l

छत्तीसगढ़ छटा को देखो 
इसका वर्णन अब तो लेखोl
*परिधान नार नर जो पहने* l
*रुप अनुपम उनके क्या कहने* l


,लुगरी लहँगा सलुखा, साया।
देख सभी का मन भरमाया।।
लुरकी, तिरकी, खिनवा, झुमके।
छत्तीसगढ़ी नारी ठुमके।।

शिवमंदिर चन्दखुरी साया।
बारसूर और महामाया ।।
पुरातत्व कहता चढ़ माथा।
इतिहास सुनाता है गाथा 

मंदिर सुंदर नागर शैली।
वास्तुकला चहुँ दिशि में फैली।।
 मूर्तिकला नक्काशी माना।
खजुराहो पर्यटन समाना।।

बम्बलेश्वरी माता रानी ।
 माँ दंतेश्वरी शक्ति मानी ।।
सजे रायगढ़ देउरकोना ।
डीपाडीह पर्यटन होना ।।

*साहित्य* 

कविता, नाटक, गद्य की, अपनी है पहचान ।
छत्तीसगढ़ी लोक की, आप अलग है शान ।।

भारत दर्शन है करवाती।
भारत की झलकी दिखलाती।।
पढ़ो कथा पर्रा भर लाई।
श्यामलाल की है परछाई 

शृंगार शतक, कुंडल, छाया।
वहीं संगीत जीवन पाया।।
समाज सेवक, क्रांति नाटक।
बलदेव की लेखनी त्राटक।।

बख्शी जी की अंजलि, कारी।
झलमला कहानी है सारी।।
शतदल अश्रुदल है कविता ।
बनेगी निबंध कभी भविता ।।

गीता माधव गंगालहरी।
भाव सार रामायण गहरी।।
काठ कहानी का वो सपना।
माधव जी को पढ़कर जपना।।

दानलीला, करुणापच्चीसी ।
पढ़कर दिख जाती बत्तीसी।।
सुंदरलाल लिखें हैं नाटक 
ज्यों बहना ने पहना ताटक।।

(ताटक- कान में पहनने वाला गहना)

 ©️ *अनिता मंदिलवार "सपना"* 
व्याख्याता, साहित्यकार
अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़

 

हमारा छत्तीसगढ़


 

रेडियो श्रोता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

 संस्मरण  रेडियो श्रोता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ  रेडियो और मैं बचपन से रेडियो सुनने का शौक था मुझे । बचपन में रेडियो सुनते सुनते सो...