अनिता मंदिलवार मंदिलवार, व्याख्याता साहित्यकार, अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़ से

Thursday, 20 January 2022

आईना हूँ


 नई प्रस्तुति ......


हाथ बढ़ाओ जरा और सँभाल लो हमें ।

गमों के दौर से बाहर निकाल लो हमें ।।

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जिन्दगी यूँ ही तमाम बीत जायेगी यहाँ ।

ऑखों में अपने ख्वाब सा पाल लो हमें ।।

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वक्त की गर्दिश में गुम हो न जायें कहीं ।

वक्त रहते ही थोड़ा सा खंगाल लो हमें ।।

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यूँ दूर रहकर हमसे दूरियाॅ न बढ़ाओ ।

पास आकर तुम जरा देखभाल लो हमें ।।

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कोई पत्थर के जैसा न समझो मुझको ।

नगीना समझ हाथों में डाल लो हमें ।।

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देखो यहाँ रहे न कोई 'सपना' अधूरा ।

आईना हूँ देखकर जरा सँवार लो हमें ।।


......... ..................सपना

Thursday, 6 January 2022

हम

 


हम

मैं
और तुम
अब हैं हम
हम शब्द
एहसास दिलाता है
दो व्यक्तियों के लिए
समाज, परिवार
और देश के लिए
आज देश को
जरूरत है हम बनें
हम कोशिश करें
मैं रहकर हम बनने की
साथ होकर
एक हुए हमेशा
कामयाब हुए
क्योंकि
एकता में शक्ति होती है
ऐसा पढा, देखा,सीखा हमनें
तो आइए आज हम
साथ न होकर भी
साथ निभायें अपनों के
देश के प्रति
अपनी जिम्मेदारी निभायें
यही तो प्रेम है
देश प्रेम
जिसने हमें सब दिया है
अब हमारी बारी है ।

अनिता मंदिलवार सपना


Sunday, 31 October 2021

छत्तीसगढ़ दर्शन

चौपाई

भारत दर्शन 
छत्तीसगढ़ राज्य 
( संस्कृति, कला, साहित्य )

 *लोकगीत, लोकनृत्य, लोकभाषा* 

भाषा इसकी है सरल, सजा मधुर है गीत ।
मीठी लगती बात है, बोल सरस ले  जीत ।

जहाँ लोक संस्कृति हो ऐसा।
जीवन भी हो जाता वैसा।।
चंदैनी गीत पंडवानी ।
सुनो नहीं इसकी है सानी।।

गहिरा, घासीदास महाना।
परिचित है सब लोग जहाना।।
बस्तर के महाकाव्य धनकुल।
हरिहर के तो भाग्य गए खुल।।

देवदास बंजारे नामी।
सोच देख वही दूरगामी।।
पंथी नृत्य को है मढ़ाया ।
छत्तीसगढ़ी मान बढ़ाया ।।

सभी सतपुड़ा शोभा जानो।
महानदी को महान मानो।।
सागौन, साल शोभा न्यारे ।
हरियाली भर देखो प्यारे ।।

छत्तीसगढ़ी विद्या सागर।
रामदयाल उत्तमा आगर।।
गाँव फूल घलो गोठियाथे 
प्यारेलाल याद जो आथे ।।


 *खानपान, त्योहार, व्रत* 

देखो अनुपम रीत ये, पल पल में  त्योहार ।
पाहुन का सत्कार हो, प्रेम धर्म है सार ।।

करम वृक्ष बनता है  राजा
श्रम करते माने सब काजा
करमा नाचे माँदर साजा
बजता लय गीत संग बाजा

फुगड़ी लंगडी खेल मटकन।
बचपन की वह अटकन बटकन।।
उत्सव मनता मड़ई मेला।
भिन्न भिन्न दिखता है खेला।।

परंपरागत तीजा, पोरा
माता भेजे साड़ी कोरा
मातर साथी आमाखाई
गोंचा, सरहुल है सुखदाई

बोली समृध्द मातृभाषा है
छत्तीसगढ़ी परिभाषा है
लिपि देवनागरी इसकी
व्याकरण सरल समझो जिसकी

भजिया, भुजिया, मुठिया,चीला।
परिधान खिलता यहाँ  पीला।।
शृंगारित नारी मन *मोहे* ।
बिंदी माथे पर है *सोहे* ।।


 *मूर्तिकला, वास्तुकला, वेशभूषा* 

अपना है छत्तीसगढ़, सुंदर पावन धाम ।
अंबा का है राज्य ये, मन में बसते राम l

छत्तीसगढ़ छटा को देखो 
इसका वर्णन अब तो लेखोl
*परिधान नार नर जो पहने* l
*रुप अनुपम उनके क्या कहने* l


,लुगरी लहँगा सलुखा, साया।
देख सभी का मन भरमाया।।
लुरकी, तिरकी, खिनवा, झुमके।
छत्तीसगढ़ी नारी ठुमके।।

शिवमंदिर चन्दखुरी साया।
बारसूर और महामाया ।।
पुरातत्व कहता चढ़ माथा।
इतिहास सुनाता है गाथा 

मंदिर सुंदर नागर शैली।
वास्तुकला चहुँ दिशि में फैली।।
 मूर्तिकला नक्काशी माना।
खजुराहो पर्यटन समाना।।

बम्बलेश्वरी माता रानी ।
 माँ दंतेश्वरी शक्ति मानी ।।
सजे रायगढ़ देउरकोना ।
डीपाडीह पर्यटन होना ।।

*साहित्य* 

कविता, नाटक, गद्य की, अपनी है पहचान ।
छत्तीसगढ़ी लोक की, आप अलग है शान ।।

भारत दर्शन है करवाती।
भारत की झलकी दिखलाती।।
पढ़ो कथा पर्रा भर लाई।
श्यामलाल की है परछाई 

शृंगार शतक, कुंडल, छाया।
वहीं संगीत जीवन पाया।।
समाज सेवक, क्रांति नाटक।
बलदेव की लेखनी त्राटक।।

बख्शी जी की अंजलि, कारी।
झलमला कहानी है सारी।।
शतदल अश्रुदल है कविता ।
बनेगी निबंध कभी भविता ।।

गीता माधव गंगालहरी।
भाव सार रामायण गहरी।।
काठ कहानी का वो सपना।
माधव जी को पढ़कर जपना।।

दानलीला, करुणापच्चीसी ।
पढ़कर दिख जाती बत्तीसी।।
सुंदरलाल लिखें हैं नाटक 
ज्यों बहना ने पहना ताटक।।

(ताटक- कान में पहनने वाला गहना)

 ©️ *अनिता मंदिलवार "सपना"* 
व्याख्याता, साहित्यकार
अंबिकापुर सरगुजा छत्तीसगढ़

 

हमारा छत्तीसगढ़


 

Saturday, 28 August 2021

समय तो आएगा ही- अनिता मंदिलवार सपना

 समय तो आएगा ही


समय तो आएगा ही जब हम सोचते हैं तो सफलता हमसे एक कदम हर बार पीछे चली जाती है । हर पल जीवन में नए अवसरों का एक बड़ा भंडार है। इसलिए, हमें इस कीमती समय को जाने नहीं देना चाहिए और हमेशा इसका पूरा उपयोग करना चाहिए। यदि हम समय के मूल्य और संकेत को समझने में देर करते हैं, तो हम अपने जीवन से स्वर्णावसर और सबसे महत्वपूर्ण समय को खो देंगे। यह जीवन का सबसे आधारपूर्ण सत्य है कि, हमें कभी भी अपने स्वर्ण अवसर को अनावश्यक समझते हुए अपने से दूर जाने नहीं देना चाहिए। समय बहुत ही शक्तिशाली होता है; कोई भी इसके सामने घुटने टेक सकता है, लेकिन इसे हरा नहीं सकता। हम इसकी क्षमता को मापने में सक्षम नहीं है, क्योंकि कभी-कभी जीतने के लिए एक पल ही काफी होता है और कभी-कभी जीतने के लिए पूरा जीवन लग जाता है। कोई भी एक पल में अमीर हो सकता है और कोई भी एक ही पल में गरीब भी हो सकता है। जीवन और मृत्यु के बीच में अन्तर के लिए केवल एक ही पल काफी होता है। सभी पल हमारे लिए स्वर्णावसर लाते हैं, हमें तो केवल समय के संकेत को समझ कर उसका प्रयोग करने की आवश्यकता है।हमें दूसरों की गलतियों से सीखने के साथ ही दूसरों की सफलता से प्रेरित होना चाहिए। हमें अपने समय का उपयोग कुछ उपयोगी कामों को करने में करना चाहिए ताकि, हमें समय समृद्धि दे, न कि नष्ट करे ।

 समय की बर्बादी हमें और हमारे भविष्य को बर्बाद करती है। हम कभी भी बर्बाद किए हुए समय को फिर से प्राप्त नहीं कर सकते हैं। यदि हम अपना समय बर्बाद कर रहे हैं, तो हम सब कुछ नष्ट कर रहे हैं । समय की कीमत पहचानिए । ये सोचिए कि समय आएगा ही ।

बीता समय कभी वापस नहीं आता ।


अनिता मंदिलवार "सपना"  


Sunday, 18 July 2021

भरोसा- अनिता मंदिलवार सपना


 🌹*भरोसा* 🌹


भरोसा जब किया हमने,

                 लगा उसे भ्रम है ।

चक्षु बंद हैं  उसके,

                 और अपनी नम है ।।

जग को दिया है उजाला,

               मेरे हिस्से क्यूँ तम हैं ।

कर्म करती रही सपना,

                लगे हर बार कम है ।।


 *अनिता मंदिलवार "सपना"*

Wednesday, 7 July 2021

नवगीत - भरे पलक - सपना




नवगीत


भरे पलक स्नेह समर्पण 

आकर मुझे रिझाते हैं ।


प्रेम भरे अभिनंदन पर

नेह भरा उत्सव समर्पण 

रोम रोम श्वास समर्पित 

प्रीत रंगा गीत अर्पण 

नेह पगी देह गंध से

मन को ये महकाते हैं  ।


ह्रदय बजते नेह वंशी

भरे जागृति प्रलय पुंज 

भूली यादें नयी हुई

जीवन राग किसलय कुंज 

सपने बुनते प्रणय रंग

अनुपम रस छलकाते हैं  ।


चिड़िया पंखों से झलती

बन टहनी बाँहे झूली

आँधी भावुक हो मचली

हवा में पंथ वह भूली

खिली धूप में चिट्ठियों के 

खूब संदेशे आते हैं ।


भरे पलक••••

आकर••••••


अनिता मंदिलवार सपना 

 

 


रेडियो श्रोता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

 संस्मरण  रेडियो श्रोता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ  रेडियो और मैं बचपन से रेडियो सुनने का शौक था मुझे । बचपन में रेडियो सुनते सुनते सो...